नक्षत्र किसे कहते हैं? जानिए।



                             


नक्षत्र 'अनेक तारों के समूह' को कहा जाता है। आकाश मैं पृथ्वी के चारों ओर तारों के समूह हैं ,जो रात में दिखाई देते हैं पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र को पार कर लेता है। लेकिन  पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करते हुए पार करने में इसे लगभग 14 दिन का समय लगता है।



 यही कारण है कि भारतीय पंचांग महीने  मैं 14 दिनों का एक पक्ष शुक्ल  कृष्ण होता है। कुछ प्रमुख नक्षत्रों के नाम हैं :- मेघा,स्वाति, चित्र, हस्त, रेवती, आर्द्रा ,पुनर्वसु आदि पृथ्वी की परिक्रमा के दौरान अनेक नक्षत्र समूह से होकर गुजरती है ब्रह्मांड में मिश्रित आकृति के अनेक नक्षत्र  समूह  है। 

आकृति के अनुसार इनको भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है। मछली की आकृति वाले नक्षत्र को 'मीन' तथा तराजू की आकृति वाले नक्षत्र को 'तुला' कहते हैं। भारतीय  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नक्षत्र समूह को राशि के नाम से जाना जाता है राशियों की संख्या 12 है इनके नाम है :- मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या ,तुला, वृश्चिक ,मकर ,धनु, कुंभ और मीन किसी तारे का जीवन चक्र आकाशगंगा में हाइड्रोजन तथा हिलियम गैस के संघनन से शुरू होता है ,जो अंततः छोटे-छोटे घने बादलों का रूप धारण कर लेते हैं।


आकार बढ़ने पर स्वयं के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण  ताप लगभग 173 डिग्री सेंटीग्रेड तक हो जाता है। जब बादल काफी बड़ा होता है, तो निपात के कारण की रेसिपी से खुलने लगता है तथा यह आदि  तारा प्रोटोस्टार कहलाता है।आदि  तारों के  सिकुड़ने  पर गैस के बादल में परमाणुओं की परस्पर टक्कर की संख्या बढ़ जाती है। सिकुड़न की प्रक्रिया एक  अरब वर्ष  तक चलती है तथा आंतरिक ताप  100 डिग्री सेंटीग्रेड तक हो जाता है।


फलत: हाइड्रोजन हिलियम का नाभिक बनने लगता है, इससे सीमित मात्रा में ऊर्जा  मुक्त होती है। इससे अंदर का ताप  दाब और बढ़ जाता है, जिससे तारों का निर्माण हो जाता है। तारों के अंदर ही अंदर  दाब के अधिक बढ़ने से गैसीय पदार्थों का और अधिक निपात रुक जाता है तारों में गुरुत्वाकर्षण बल संपीडन उत्पन्न करता है तथा दूसरा बल संलयन अभिक्रिया द्वारा  मुक्त ऊर्जा के कारण उत्पन्न  आंतरिक दबाव के कारण होता है।


 इन दोनों  बलों में हजारों अरबों वर्ष तक संतुलन बना रह सकता है यदि संलयन से मुक्त ऊर्जा के कारण आंतरिक  दबाव उत्पन्न ना होता हो तो विशाल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव के कारण सूर्य अपने उत्पत्ति के आधे घंटे के अंदर ही सिकुड़ जाता है  सूर्य अपने विकास के इस संतुलित चरण में है इसकी उत्पत्ति लगभग  4600 अरब वर्ष पूर्व हुई थी यह भविष्य मैं इतनी ही लंबी अवधि तक ऊर्जा मुक्त करता रहेगा।

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