शहद एक संजीवनी


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शहद प्रकृतिप्रदत्त एक चमत्कारी उपहार है, जिसकी उत्पत्ति सूर्य की रोशनी, फूल के पराग एवं सुगंध की रासायनिक क्रियाओं से होती है। इसका निर्माण करने वाली मधुमक्खियाँ परमार्थभाव एवं आपसी सहकार से इसे बनाती, पकाती एवं मनुष्य को प्रदान करती हैं। 


यह समस्त विटामिनों के साथ सत्तर तत्त्वों के संगठन से उत्पादित मिश्रण है, जिसमें पोषक क्षमता तो अद्भुत है ही, साथ ही औषधियुक्त गुण भी हैं। ये किसी भी परिस्थिति में नष्ट नहीं होते। शहद में फुरती बढ़ाने, पेट को संतुलित रखने, पाचनतंत्र को सुव्यवस्थित बनाने, स्मरण शक्ति को विकसित करने एवं बुद्धि विकास के साथ प्रत्युत्पन्नमति मेधा विकसित करने की अद्भुत क्षमता है। 


एक शब्द में इसे संजीवनी बूटी एवं अमृत कहा जाए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। सरदी के दिनों में शरीर को गरम बनाए रखने एवं सरदी जुकाम से बचाए रखने में लोग बादाम को शहद में मिलाकर लिया करते थे एवं शक्तिवर्द्धक टॉनिक के रूप में इसका उपयोग करते थे। प्राचीनकाल के अधिकांश लोग शारीरिक गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए शहद का ही प्रयोग किया करते थे। 


चिकित्सकों का मत था कि समस्त नेत्र संबंधी रोगों को दूर करने में शहद सक्षम है। फोड़े-फुंसी से लेकर जले-कटे अंगों में शहद का लेप लगाकर वे रोगियों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया करते थे। आग से जलने पर शहद का उपचार हानिरहित एवं लाभप्रद उपचार था। रूस की लोक-कथाओं तक में शहद की औषधियुक्त क्षमताओं का वर्णन है। 


वहाँ के स्मृति ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि अनेक औषधियाँ शहद से ही तैयार होती हैं अथवा शहद मिलाने से ही लाभदायक बनती हैं। वहाँ लहसुन, बादाम, अफीम, अंगूर आदि से विनिर्मित औषधियों में शहद का अनिवार्य स्थान माना जाता है। वर्तमान में भी सरदी जुकाम से सर्वथा मुक्ति पाने के लिए सलाह दी जाती है कि एक कप गरम दूध में एक चम्मच शहद डालकर सोने से पहले पी लिया जाए। 


यहाँ तक कि मोटापा घटाने में भी शहद अचूक औषधि है। 'शहद पेट का सबसे अधिक एवं निकट का घनिष्ठ मित्र है।" यह प्राचीनकाल की कहावत थो। आधुनिक विज्ञानी पूर्णत: आश्वस्त हैं कि भोजन के सुनियोजित पाचन के लिए एवं एसीडिटी के साथ गैस बनने से रोकने में शहद अचूक औषधि का कार्य करता है। 


एसीडिटी जनित जितने भी अल्सर एवं पेट दरद के रोग हैं, सभी शहद के द्वारा सहज में ही ठीक किए जा सकते हैं। एक चम्मच शहद को एक गिलास गरम जल में लेने से अचूक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यह अनुभव किया गया है कि भोजन से दो घंटे पहले यदि शहद जल के साथ मिलाकर पिया जाए तो एसोडिटी तत्काल अपना अस्तित्व गंवा बैठती है।


 दो या छह माह के शहदयुक्त उपचार से लोग स्वास्थ्य-लाभ प्राप्त करने लगते हैं। शहद में अद्भुत पोषण क्षमता है। चॉकलेट कोका की तरह ये हानिकारक नहीं है। १०० ग्राम शहद से ३३५ कैलोरी ऊर्जा मिलती है। यह ऊर्जा उनके लिए लाभकारी है जो किन्हीं कारणवश शारीरिक एवं मानसिक थकान महसूस करते हैं अथवा गंभीर रोगों से पीड़ित हुए हैं।


 शहद में विद्यमान प्राकृतिक ग्लूकोज रक्त में तेजी के साथ मिलकर स्फूर्तिवर्द्धक शक्ति एवं तेजस्विता बढ़ाता है। छह सप्ताह तक नियमित रूप से शहद का सेवन करने पर रक्त के हीमोग्लोबीन तत्त्वों में वृद्धि होती है, जो वायुमंडल से ऑक्सीजन लेकर शरीर को स्वस्थ बनाती है। 


शहद को किसी भी दृष्टि से देखें, यह सर्वथा लाभदायक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक ही सिद्ध होता है। गैस संबंधी हृदय रोगों, गुरदा एवं 1. पाचन संबंधी रोगों को दूर करने में शहद ने आश्चर्यजनक सफलता पाई है। उदाहरण के लिए किडनी में खराबी उत्पन्न होने पर भी चिकित्सक शहद लेने का परामर्श देते हैं। २०० ग्राम जल में २ चम्मच शहद सोने से पहले लेने पर यह नींद के लिए सर्वोत्तम औषधि है।


 स्वस्थ व्यक्ति एवं बच्चे भी इसका सेवन चाव से करते हैं, क्योंकि हानिकारक जीवाणु को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता शहद में है। यह रोगप्रतिरोधी शक्ति को भी बढ़ाती है। यह सत्य है कि बीमार व्यक्तियों को स्वास्थ्य-लाभ पहुँचाने एवं तत्काल रोगमुक्त करने में शहद तीव्र औषधि है।


 इसे वृद्ध को युवा करने वाले च्यवनप्राश की संज्ञा भी दें तो अतिशयोक्ति न होगी। शहद सर्वसुलभ एवं सर्वोपयोगी सस्ता पदार्थ है। यदि इसके उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए. अपने गाँव, घर, खेत-खलिहान में शहद की पेटी लाई जाए तो सहज ही सस्ते में अनिवार्य एवं आवश्यक ग्रामोद्योग के साथ लोगों को सस्ते में सर्वोपयोगी औषधि उपलब्ध हो जाए।

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